बुधवार, 16 जून 2010

गिरिधर जी की कुन्डलिया: 1 (नवीन चतुर्वेदी की प्रस्‍तुति)

श्री गिरिधर जी की कुन्डलिया: 1 (नवीन चतुर्वेदी की प्रस्‍तुति)

सांई बैर न कीजिए, गुरु, पंडित, कवि, यार|
बेटा, बनिता, पौरिया, यज्ञ करामन हार||
यज्ञ करामन हार, राज मंत्री जो होई|
जोगी, तपसी, बैदु, आपकों तपै रसोई|
कह 'गिरिधर' कवि राय, जुगन सों ये चल आई|
इन तेरह कों 'तरह' दियें बन आवै सांई|

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